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mahabharat 1.196.2: राजा! उस यज्ञ के प्रारम्भ होने से यमराज ने मनुष्यों का संहार करने का कार्य बंद कर दिया था। इस प्रकार मृत्यु का निर्धारित समय बीत जाने पर सभी लोग अमर हो गए और दिन-प्रतिदिन बढ़ने लगे। धीरे-धीरे उनकी संख्या बहुत बढ़ गई॥ 2॥   |   mahabharat अध्याय 1.196: व्यासजीका द्रुपदको पाण्डवों तथा द्रौपदीके पूर्वजन्मकी कथा सुनाकर दिव्य दृष्टि देना और द्रुपदका उनके दिव्य रूपोंकी झाँकी करना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 196: व्यासजीका द्रुपदको पाण्डवों तथा द्रौपदीके पूर्वजन्मकी कथा सुनाकर दिव्य दृष्टि देना और द्रुपदका उनके दिव्य रूपोंकी झाँकी करना  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  1.196.2 
ततो यमो दीक्षितस्तत्र राजन्
नामारयत् कंचिदपि प्रजानाम्।
तत: प्रजास्ता बहुला बभूवु:
कालातिपातान्मरणप्रहीणा:॥ २॥
 
 
अनुवाद
राजा! उस यज्ञ के प्रारम्भ होने से यमराज ने मनुष्यों का संहार करने का कार्य बंद कर दिया था। इस प्रकार मृत्यु का निर्धारित समय बीत जाने पर सभी लोग अमर हो गए और दिन-प्रतिदिन बढ़ने लगे। धीरे-धीरे उनकी संख्या बहुत बढ़ गई॥ 2॥
 
King! Due to the initiation of that yagya, Yamraj had stopped the work of killing human beings. In this way, after the stipulated time of death passed, all the people became immortal and started increasing day by day. Gradually, their number increased a lot.॥ 2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)