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mahabharat 1.196.14: व्यासजी कहते हैं - हे राजन! ऐसा कहकर इन्द्र भी उस स्त्री के पीछे-पीछे आगे बढ़े। हिमालय की चोटी पर पहुँचकर उन्होंने देखा कि पास ही एक अत्यंत सुंदर युवक सिद्धासन में बैठा है, और उसके साथ एक युवती भी है। इन्द्र ने उसे उस युवती के साथ क्रीड़ा करते और रमण करते देखा॥14॥   |   mahabharat अध्याय 1.196: व्यासजीका द्रुपदको पाण्डवों तथा द्रौपदीके पूर्वजन्मकी कथा सुनाकर दिव्य दृष्टि देना और द्रुपदका उनके दिव्य रूपोंकी झाँकी करना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 196: व्यासजीका द्रुपदको पाण्डवों तथा द्रौपदीके पूर्वजन्मकी कथा सुनाकर दिव्य दृष्टि देना और द्रुपदका उनके दिव्य रूपोंकी झाँकी करना  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  1.196.14 
व्यास उवाच
तां गच्छन्तीमन्वगच्छत् तदानीं
सोऽपश्यदारात् तरुणं दर्शनीयम्।
सिद्धासनस्थं युवतीसहायं
क्रीडन्तमैक्षद् गिरिराजमूर्ध्नि॥ १४॥
 
 
अनुवाद
व्यासजी कहते हैं - हे राजन! ऐसा कहकर इन्द्र भी उस स्त्री के पीछे-पीछे आगे बढ़े। हिमालय की चोटी पर पहुँचकर उन्होंने देखा कि पास ही एक अत्यंत सुंदर युवक सिद्धासन में बैठा है, और उसके साथ एक युवती भी है। इन्द्र ने उसे उस युवती के साथ क्रीड़ा करते और रमण करते देखा॥14॥
 
Vyasa says - O King! Saying this, Indra also followed the woman going ahead. On reaching the peak of the Himalayas, he saw that a very handsome young man was sitting nearby in a Siddhasana posture, and a young woman was also with him. Indra saw him playing and frolicking with that young woman.॥14॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)