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mahabharat 1.196.13: कन्या बोली - हे देवराज इन्द्र! मैं एक असहाय अभागिनी हूँ; आपको पता चल जाएगा कि मैं कौन हूँ और क्यों रो रही हूँ। आप मेरे पीछे-पीछे आइए, मैं आगे-आगे चल रही हूँ। जब आप वहाँ जाएँगे, तो आप स्वयं देख लेंगे कि मैं क्यों रो रही हूँ॥13॥   |   mahabharat अध्याय 1.196: व्यासजीका द्रुपदको पाण्डवों तथा द्रौपदीके पूर्वजन्मकी कथा सुनाकर दिव्य दृष्टि देना और द्रुपदका उनके दिव्य रूपोंकी झाँकी करना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 196: व्यासजीका द्रुपदको पाण्डवों तथा द्रौपदीके पूर्वजन्मकी कथा सुनाकर दिव्य दृष्टि देना और द्रुपदका उनके दिव्य रूपोंकी झाँकी करना  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  1.196.13 
स्त्र्युवाच
त्वं वेत्स्यसे मामिह यास्मि शक्र
यदर्थं चाहं रोदिमि मन्दभाग्या।
आगच्छ राजन् पुरतो गमिष्ये
द्रष्टासि तद् रोदिमि यत्कृतेऽहम्॥ १३॥
 
 
अनुवाद
कन्या बोली - हे देवराज इन्द्र! मैं एक असहाय अभागिनी हूँ; आपको पता चल जाएगा कि मैं कौन हूँ और क्यों रो रही हूँ। आप मेरे पीछे-पीछे आइए, मैं आगे-आगे चल रही हूँ। जब आप वहाँ जाएँगे, तो आप स्वयं देख लेंगे कि मैं क्यों रो रही हूँ॥13॥
 
The girl said - O king of gods Indra! I am a helpless unfortunate woman; you will come to know who I am and why I am crying. You follow me, I am walking ahead. When you go there you will see for yourself why I am crying.॥ 13॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)