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mahabharat 1.195.9: इसलिये मैं इस धर्म-विरोधी आचरण का प्रयोग नहीं करना चाहता। इस कर्म की धार्मिकता के विषय में मुझे सदैव संदेह रहता है॥9॥   |   mahabharat अध्याय 1.195: व्यासजीके सामने द्रौपदीका पाँच पुरुषोंसे विवाह होनेके विषयमें द्रुपद, धृष्टद्युम्न और युधिष्ठिरका अपने-अपने विचार व्यक्त करना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 195: व्यासजीके सामने द्रौपदीका पाँच पुरुषोंसे विवाह होनेके विषयमें द्रुपद, धृष्टद्युम्न और युधिष्ठिरका अपने-अपने विचार व्यक्त करना  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  1.195.9 
ततोऽहं न करोम्येनं व्यवसायं क्रियां प्रति।
धर्म: सदैव संदिग्ध: प्रतिभाति हि मे त्वयम्॥ ९॥
 
 
अनुवाद
इसलिये मैं इस धर्म-विरोधी आचरण का प्रयोग नहीं करना चाहता। इस कर्म की धार्मिकता के विषय में मुझे सदैव संदेह रहता है॥9॥
 
That is why I do not want to use this anti-religious practice. I always feel doubtful about the righteousness of this action.॥ 9॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)