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mahabharat 1.195.6: व्यासजी बोले - 'क्योंकि यह अत्यन्त गम्भीर और शास्त्रों से आवृत है, अतः मैं वेद और लोक के विरुद्ध इस धर्म के विषय में आप सबका मत सुनना चाहता हूँ।' ॥6॥   |   mahabharat अध्याय 1.195: व्यासजीके सामने द्रौपदीका पाँच पुरुषोंसे विवाह होनेके विषयमें द्रुपद, धृष्टद्युम्न और युधिष्ठिरका अपने-अपने विचार व्यक्त करना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 195: व्यासजीके सामने द्रौपदीका पाँच पुरुषोंसे विवाह होनेके विषयमें द्रुपद, धृष्टद्युम्न और युधिष्ठिरका अपने-अपने विचार व्यक्त करना  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  1.195.6 
व्यास उवाच
अस्मिन् धर्मे विप्रलब्धे लोकवेदविरोधके।
यस्य यस्य मतं यद् यच्छ्रोतुमिच्छामि तस्य तत्॥ ६॥
 
 
अनुवाद
व्यासजी बोले - 'क्योंकि यह अत्यन्त गम्भीर और शास्त्रों से आवृत है, अतः मैं वेद और लोक के विरुद्ध इस धर्म के विषय में आप सबका मत सुनना चाहता हूँ।' ॥6॥
 
Vyasa said, 'Because it is very deep and is covered by the scriptures, I want to hear the opinion of each one of you regarding this Dharma which is against the Vedas and the world.' ॥ 6॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)