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mahabharat 1.195.4-5: राजन! तत्पश्चात् दो घड़ी पश्चात राजा द्रुपद ने महात्मा व्यास से मधुर वाणी में बात करते हुए उनसे द्रौपदी के विषय में पूछा - 'भगवन! एक ही स्त्री अनेक पुरुषों की पत्नी कैसे हो सकती है? कृपया मुझे यह सब विस्तारपूर्वक बताइये, जिससे उस पर व्यभिचार का दोष न लगे।'   |   mahabharat अध्याय 1.195: व्यासजीके सामने द्रौपदीका पाँच पुरुषोंसे विवाह होनेके विषयमें द्रुपद, धृष्टद्युम्न और युधिष्ठिरका अपने-अपने विचार व्यक्त करना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 195: व्यासजीके सामने द्रौपदीका पाँच पुरुषोंसे विवाह होनेके विषयमें द्रुपद, धृष्टद्युम्न और युधिष्ठिरका अपने-अपने विचार व्यक्त करना  »  श्लोक 4-5
 
 
श्लोक  1.195.4-5 
ततो मुहूर्तान्मधुरां वाणीमुच्चार्य पार्षत:।
पप्रच्छ तं महात्मानं द्रौपद्यर्थं विशाम्पते॥ ४॥
कथमेका बहूनां स्याद् धर्मपत्नी न संकर:।
एतन्मे भगवान् सर्वं प्रब्रवीतु यथातथम्॥ ५॥
 
 
अनुवाद
राजन! तत्पश्चात् दो घड़ी पश्चात राजा द्रुपद ने महात्मा व्यास से मधुर वाणी में बात करते हुए उनसे द्रौपदी के विषय में पूछा - 'भगवन! एक ही स्त्री अनेक पुरुषों की पत्नी कैसे हो सकती है? कृपया मुझे यह सब विस्तारपूर्वक बताइये, जिससे उस पर व्यभिचार का दोष न लगे।'
 
King! Thereafter after two hours, King Drupada spoke sweetly to Mahatma Vyas and asked him about Draupadi - 'Lord! How can a single woman be the wife of many men? Please tell me all this in detail so that the blame of adultery is not put on her.'
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)