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mahabharat 1.195.23: तत्पश्चात् व्यासजी ने उस महान राजा को वह कथा सुनाई जिसके अनुसार यह धर्मसम्मत माना गया है कि अनेक पुरुष एक ही पत्नी से विवाह करते हैं॥ 23॥   |   mahabharat अध्याय 1.195: व्यासजीके सामने द्रौपदीका पाँच पुरुषोंसे विवाह होनेके विषयमें द्रुपद, धृष्टद्युम्न और युधिष्ठिरका अपने-अपने विचार व्यक्त करना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 195: व्यासजीके सामने द्रौपदीका पाँच पुरुषोंसे विवाह होनेके विषयमें द्रुपद, धृष्टद्युम्न और युधिष्ठिरका अपने-अपने विचार व्यक्त करना  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  1.195.23 
ततो द्वैपायनस्तस्मै नरेन्द्राय महात्मने।
आचख्यौ तद् यथा धर्मो बहूनामेकपत्नता॥ २३॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् व्यासजी ने उस महान राजा को वह कथा सुनाई जिसके अनुसार यह धर्मसम्मत माना गया है कि अनेक पुरुष एक ही पत्नी से विवाह करते हैं॥ 23॥
 
Thereafter Vyasa narrated to that great king the story according to which it was considered in accordance with Dharma that many men marry the same wife.॥ 23॥
 
इति श्रीमहाभारते आदिपर्वणि वैवाहिकपर्वणि व्यासवाक्ये पञ्चनवत्यधिकशततमोऽध्याय:॥ १९५॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत आदिपर्वके अन्तर्गत वैवाहिकपर्वमें व्यासवाक्यविषयक एक सौ पंचानबेवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ १९५॥

 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)