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mahabharat 1.195.22: पाँचों पाण्डव, कुन्तीदेवी और द्रुपदपुत्र धृष्टद्युम्न, ये सभी जहाँ भी बैठे थे, उन दोनों (व्यास और द्रुपद) की प्रतीक्षा करने लगे।   |   mahabharat अध्याय 1.195: व्यासजीके सामने द्रौपदीका पाँच पुरुषोंसे विवाह होनेके विषयमें द्रुपद, धृष्टद्युम्न और युधिष्ठिरका अपने-अपने विचार व्यक्त करना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 195: व्यासजीके सामने द्रौपदीका पाँच पुरुषोंसे विवाह होनेके विषयमें द्रुपद, धृष्टद्युम्न और युधिष्ठिरका अपने-अपने विचार व्यक्त करना  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  1.195.22 
पाण्डवाश्चापि कुन्ती च धृष्टद्युम्नश्च पार्षत:।
विविशुर्यत्र तत्रैव प्रतीक्षन्ते स्म तावुभौ॥ २२॥
 
 
अनुवाद
पाँचों पाण्डव, कुन्तीदेवी और द्रुपदपुत्र धृष्टद्युम्न, ये सभी जहाँ भी बैठे थे, उन दोनों (व्यास और द्रुपद) की प्रतीक्षा करने लगे।
 
The five Pandavas, Kuntidevi and Dhrishtadyumna, the son of Drupada, all of them waited for those two (Vyasa and Drupada) wherever they were sitting.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)