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व्यास उवाच
अनृतान्मोक्ष्यसे भद्रे धर्मश्चैष सनातन:।
न तु वक्ष्यामि सर्वेषां पाञ्चाल शृणु मे स्वयम्॥ १९॥
अनुवाद
व्यासजी ने कहा - हे प्रिये! तुम झूठ बोलने से बच जाओगे। यही सनातन धर्म है (पाण्डवों का)। (कुन्ती से ऐसा कहकर वे द्रुपद से बोले) हे पांचालराज! (इस विवाह में एक रहस्य है, जिसे) मैं सबके सामने नहीं कहूँगा। तुम स्वयं अकेले जाकर मुझसे उसे सुनो।॥19॥
Vyasji said - O dear! You will be saved from lying. This is Sanatan Dharma (for the Pandavas). (After saying this to Kunti, he said to Drupada) O King of Panchala! (There is a secret in this marriage, which) I will not tell in front of everyone. You yourself go alone and listen to it from me.॥ 19॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥