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mahabharat 1.195.16: हे धर्म के जानने वालों में श्रेष्ठ व्यास! गुरुओं की आज्ञा धर्म के अनुकूल कही गई है और माता को सभी गुरुओं में सर्वोच्च गुरु माना गया है॥16॥   |   mahabharat अध्याय 1.195: व्यासजीके सामने द्रौपदीका पाँच पुरुषोंसे विवाह होनेके विषयमें द्रुपद, धृष्टद्युम्न और युधिष्ठिरका अपने-अपने विचार व्यक्त करना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 195: व्यासजीके सामने द्रौपदीका पाँच पुरुषोंसे विवाह होनेके विषयमें द्रुपद, धृष्टद्युम्न और युधिष्ठिरका अपने-अपने विचार व्यक्त करना  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  1.195.16 
गुरोर्हि वचनं प्राहुर्धर्म्यं धर्मज्ञसत्तम।
गुरूणां चैव सर्वेषां माता परमको गुरु:॥ १६॥
 
 
अनुवाद
हे धर्म के जानने वालों में श्रेष्ठ व्यास! गुरुओं की आज्ञा धर्म के अनुकूल कही गई है और माता को सभी गुरुओं में सर्वोच्च गुरु माना गया है॥16॥
 
Vyasa, the best amongst all those who know Dharma! The orders of the Gurus are said to be in accordance with Dharma and the mother is considered to be the supreme Guru amongst all the Gurus.॥ 16॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)