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श्लोक 1.194.27  |
द्रुपद उवाच
एकस्य बह्वॺो विहिता महिष्य: कुरुनन्दन।
नैकस्या बहव: पुंस: श्रूयन्ते पतय: क्वचित्॥ २७॥ |
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| अनुवाद |
| द्रुपद बोले, 'कुरुनन्दन! वेदों में एक राजा और अनेक रानियाँ होने का वर्णन मिलता है (अथवा एक पुरुष की अनेक पत्नियाँ हो सकती हैं), किन्तु किसी स्त्री के अनेक पति होने का वर्णन कभी नहीं मिलता। |
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| Drupada said, 'Kurunandan! It is found in the Vedas that there may be one king and many queens (or one man may have many wives); but it is never heard of a woman having many husbands. |
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