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mahabharat 1.194.18-19: राजन! तत्पश्चात् कुन्ती, श्रीकृष्ण, युधिष्ठिर, भीमसेन, अर्जुन, नकुल और सहदेव राजा द्रुपद द्वारा निर्दिष्ट विशाल भवन में गए और यज्ञसेन (द्रुपद) द्वारा सम्मानित होकर वहाँ रहने लगे। इस प्रकार विश्वास स्थापित हो जाने पर महाराज द्रुपद अपने पुत्रों के साथ जाकर युधिष्ठिर से बोले - 18-19॥   |   mahabharat अध्याय 1.194: द्रुपद और युधिष्ठिरकी बातचीत तथा व्यासजीका आगमन   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 194: द्रुपद और युधिष्ठिरकी बातचीत तथा व्यासजीका आगमन  »  श्लोक 18-19
 
 
श्लोक  1.194.18-19 
तत: कुन्ती च कृष्णा च भीमसेनार्जुनावपि।
यमौ च राज्ञा संदिष्टं विविशुर्भवनं महत्॥ १८॥
तत्र ते न्यवसन् राजन् यज्ञसेनेन पूजिता:।
प्रत्याश्वस्तस्ततो राजा सह पुत्रैरुवाच तम्॥ १९॥
 
 
अनुवाद
राजन! तत्पश्चात् कुन्ती, श्रीकृष्ण, युधिष्ठिर, भीमसेन, अर्जुन, नकुल और सहदेव राजा द्रुपद द्वारा निर्दिष्ट विशाल भवन में गए और यज्ञसेन (द्रुपद) द्वारा सम्मानित होकर वहाँ रहने लगे। इस प्रकार विश्वास स्थापित हो जाने पर महाराज द्रुपद अपने पुत्रों के साथ जाकर युधिष्ठिर से बोले - 18-19॥
 
Rajan! Thereafter, Kunti, Krishna, Yudhishthir, Bhimsen, Arjun, Nakul and Sahadeva went to the huge house specified by King Drupada and after being honored by Yajnasena (Drupada), they started living there. After this confidence was established, Maharaja Drupada went with his sons and said to Yudhishthira - 18-19॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)