श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 194: द्रुपद और युधिष्ठिरकी बातचीत तथा व्यासजीका आगमन  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  1.194.15 
पप्रच्छ चैनं धर्मात्मा यथा ते प्रद्रुता: पुरात्।
स तस्मै सर्वमाचख्यावानुपूर्व्येण पाण्डव:॥ १५॥
 
 
अनुवाद
तब पुण्यात्मा पांचाल नरेश ने पूछा, ‘आप सब लोग वारणावत नगरी से किस प्रकार बचकर निकले?’ पाण्डवपुत्र युधिष्ठिर ने उनसे एक-एक करके ये सब बातें कहीं॥15॥
 
Then the virtuous Panchala Naresh asked, 'How did you all escape from the city of Varanavat?' Yudhishthira, son of Pandava, narrated all these things to them one by one.॥ 15॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)