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श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 193: पाण्डवों और कुन्तीका द्रुपदके घरमें जाकर सम्मानित होना और राजा द्रुपदद्वारा पाण्डवोंके शील-स्वभावकी परीक्षा  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  1.193.4 
श्रुत्वा तु वाक्यानि पुरोहितस्य
यान्युक्तवान् भारत धर्मराज:।
जिज्ञासयैवाथ कुरूत्तमानां
द्रव्याण्यनेकान्युपसंजहार॥ ४॥
 
 
अनुवाद
उस समय पुरोहित के मुख से धर्मराज युधिष्ठिर की कही हुई बात सुनकर राजा द्रुपद ने उन महारथियों के शील की परीक्षा करने के लिए अनेक प्रकार की वस्तुएँ एकत्रित कीं॥4॥
 
India At that time, after hearing from the mouth of the priest what Dharmaraja Yudhishthir had said, King Drupada collected many types of things to test the modesty of those great warriors. 4॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)