Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.193.3: वैशम्पायन कहते हैं, 'जनमेजय! कौरवों के श्रेष्ठ पाण्डव पुरोहित को विदा करके उन विशाल रथों पर सवार होकर (राजमहल की ओर) चले। उस समय कुन्ती और कृष्ण एक ही रथ पर साथ-साथ बैठे थे। | mahabharat अध्याय 1.193: पाण्डवों और कुन्तीका द्रुपदके घरमें जाकर सम्मानित होना और राजा द्रुपदद्वारा पाण्डवोंके शील-स्वभावकी परीक्षा । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
वैशम्पायन उवाच
तत: प्रयाता: कुरुपुङ्गवास्ते
पुरोहितं तं परियाप्य सर्वे।
आस्थाय यानानि महान्ति तानि
कुन्ती च कृष्णा च सहैकयाने॥ ३॥
अनुवाद
वैशम्पायन कहते हैं, 'जनमेजय! कौरवों के श्रेष्ठ पाण्डव पुरोहित को विदा करके उन विशाल रथों पर सवार होकर (राजमहल की ओर) चले। उस समय कुन्ती और कृष्ण एक ही रथ पर साथ-साथ बैठे थे।
Vaishampayana says, 'Janamejaya! All the best Pandavas of Kurus bid farewell to the priest and proceeded on those huge chariots (towards the royal palace). At that time Kunti and Krishna were sitting together on the same chariot.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥