Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.193.15: जनमेजय! यह सब देखकर राजा द्रुपद, राजकुमार और सभी मंत्रीगण बहुत प्रसन्न हुए और उनके पास जाकर उन्होंने मन में निश्चय किया कि ये राजकुमार सचमुच कुन्तीदेवी के पुत्र हैं। | mahabharat अध्याय 1.193: पाण्डवों और कुन्तीका द्रुपदके घरमें जाकर सम्मानित होना और राजा द्रुपदद्वारा पाण्डवोंके शील-स्वभावकी परीक्षा । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
तल्लक्षयित्वा द्रुपदस्य पुत्रो
राजा च सर्वै: सह मन्त्रिमुख्यै:।
समर्थयामासुरुपेत्य हृष्टा:
कुन्तीसुतान् पार्थिव राजपुत्रान्॥ १५॥
अनुवाद
जनमेजय! यह सब देखकर राजा द्रुपद, राजकुमार और सभी मंत्रीगण बहुत प्रसन्न हुए और उनके पास जाकर उन्होंने मन में निश्चय किया कि ये राजकुमार सचमुच कुन्तीदेवी के पुत्र हैं।
Janamejaya! On seeing all this, King Drupada, the princes and all the chief ministers were very happy and on going to them they decided in their minds that these princes were indeed the sons of Kuntidevi.
इति श्रीमहाभारते आदिपर्वणि वैवाहिकपर्वणि युधिष्ठिरादिपरीक्षणे त्रिनवत्यधिकशततमोऽध्याय:॥ १९३॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत आदिपर्वके अन्तर्गत वैवाहिकपर्वमें युधिष्ठिर आदिकी परीक्षाविषयक एक सौ तिरानबेवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ १९३॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥