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mahabharat 1.193.12: पुरुषोत्तम पाण्डव अपने ज्येष्ठों और बालकों के क्रम से वहाँ रखे हुए बहुमूल्य आसनों पर बिना किसी संकोच या लज्जा के, तथा अपने हृदय में लेशमात्र भी आश्चर्य न रखते हुए बैठ गए॥12॥   |   mahabharat अध्याय 1.193: पाण्डवों और कुन्तीका द्रुपदके घरमें जाकर सम्मानित होना और राजा द्रुपदद्वारा पाण्डवोंके शील-स्वभावकी परीक्षा   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 193: पाण्डवों और कुन्तीका द्रुपदके घरमें जाकर सम्मानित होना और राजा द्रुपदद्वारा पाण्डवोंके शील-स्वभावकी परीक्षा  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  1.193.12 
ते तत्र वीरा: परमासनेषु
सपादपीठेष्वविशङ्कमाना:।
यथानुपूर्वं विविशुर्नराग्रॺा-
स्तथा महार्हेषु न विस्मयन्त:॥ १२॥
 
 
अनुवाद
पुरुषोत्तम पाण्डव अपने ज्येष्ठों और बालकों के क्रम से वहाँ रखे हुए बहुमूल्य आसनों पर बिना किसी संकोच या लज्जा के, तथा अपने हृदय में लेशमात्र भी आश्चर्य न रखते हुए बैठ गए॥12॥
 
The Pandavas, the best of men, sat down in the order of their elders and children, on the precious thrones with pedestals that were placed there, without any hesitation or shyness, and without the least trace of astonishment in their hearts. ॥12॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)