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mahabharat 1.192.28: अतः अब पांचालराज को अपनी पुत्री के लिए पश्चाताप करना उचित नहीं है। इस पृथ्वी पर उस वीर पुरुष के अतिरिक्त कोई ऐसा पुरुष नहीं है जो उस लक्ष्य को भेद सके।॥28॥   |   mahabharat अध्याय 1.192: धृष्टद्युम्नके द्वारा द्रौपदी तथा पाण्डवोंका हाल सुनकर राजा द्रुपदका उनके पास पुरोहितको भेजना तथा पुरोहित और युधिष्ठिरकी बातचीत   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 192: धृष्टद्युम्नके द्वारा द्रौपदी तथा पाण्डवोंका हाल सुनकर राजा द्रुपदका उनके पास पुरोहितको भेजना तथा पुरोहित और युधिष्ठिरकी बातचीत  »  श्लोक 28
 
 
श्लोक  1.192.28 
तस्मान्न तापं दुहितुर्निमित्तं
पाञ्चालराजोऽर्हति कर्तुमद्य।
न चापि तत्पातनमन्यथेह
कर्तुं हि शक्यं भुवि मानवेन॥ २८॥
 
 
अनुवाद
अतः अब पांचालराज को अपनी पुत्री के लिए पश्चाताप करना उचित नहीं है। इस पृथ्वी पर उस वीर पुरुष के अतिरिक्त कोई ऐसा पुरुष नहीं है जो उस लक्ष्य को भेद सके।॥28॥
 
‘Therefore, it is not right for the Panchala king to repent for his daughter now. There is no man on this earth other than that brave man who can hit that target.'॥ 28॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)