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mahabharat 1.192.27: कोई भी दुर्बल मनुष्य उस विशाल धनुष पर प्रत्यंचा नहीं चढ़ा सकता था। अस्त्र-शस्त्र विद्या में पूर्णतः प्रशिक्षित न हुए मनुष्य के लिए अथवा निम्न जाति के व्यक्ति के लिए भी उस लक्ष्य को गिराना असम्भव था॥27॥   |   mahabharat अध्याय 1.192: धृष्टद्युम्नके द्वारा द्रौपदी तथा पाण्डवोंका हाल सुनकर राजा द्रुपदका उनके पास पुरोहितको भेजना तथा पुरोहित और युधिष्ठिरकी बातचीत   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 192: धृष्टद्युम्नके द्वारा द्रौपदी तथा पाण्डवोंका हाल सुनकर राजा द्रुपदका उनके पास पुरोहितको भेजना तथा पुरोहित और युधिष्ठिरकी बातचीत  »  श्लोक 27
 
 
श्लोक  1.192.27 
न तद् धनुर्मन्दबलेन शक्यं
मौर्व्या समायोजयितुं तथा हि।
न चाकृतास्त्रेण न हीनजेन
लक्ष्यं तथा पातयितुं हि शक्यम्॥ २७॥
 
 
अनुवाद
कोई भी दुर्बल मनुष्य उस विशाल धनुष पर प्रत्यंचा नहीं चढ़ा सकता था। अस्त्र-शस्त्र विद्या में पूर्णतः प्रशिक्षित न हुए मनुष्य के लिए अथवा निम्न जाति के व्यक्ति के लिए भी उस लक्ष्य को गिराना असम्भव था॥27॥
 
‘No weak man could have strung that huge bow. It was impossible for a man who had not received full training in the art of weapons or even for a person of a low caste to bring down that target.॥ 27॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)