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mahabharat 1.192.22: जनमेजय! तब भीमसेन ने जल और जल अर्पण करके विधिपूर्वक उनकी पूजा की। उनके द्वारा की गई पूजा को प्रसन्नतापूर्वक स्वीकार करके जब पुरोहित अत्यंत सुखपूर्वक आसन पर बैठ गए, तब राजा युधिष्ठिर ने ब्राह्मण से कहा-॥22॥   |   mahabharat अध्याय 1.192: धृष्टद्युम्नके द्वारा द्रौपदी तथा पाण्डवोंका हाल सुनकर राजा द्रुपदका उनके पास पुरोहितको भेजना तथा पुरोहित और युधिष्ठिरकी बातचीत   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 192: धृष्टद्युम्नके द्वारा द्रौपदी तथा पाण्डवोंका हाल सुनकर राजा द्रुपदका उनके पास पुरोहितको भेजना तथा पुरोहित और युधिष्ठिरकी बातचीत  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  1.192.22 
भीमस्ततस्तत् कृतवान् नरेन्द्र
तां चैव पूजां प्रतिगृह्य हर्षात्।
सुखोपविष्टं तु पुरोहितं तदा
युधिष्ठिरो ब्राह्मणमित्युवाच॥ २२॥
 
 
अनुवाद
जनमेजय! तब भीमसेन ने जल और जल अर्पण करके विधिपूर्वक उनकी पूजा की। उनके द्वारा की गई पूजा को प्रसन्नतापूर्वक स्वीकार करके जब पुरोहित अत्यंत सुखपूर्वक आसन पर बैठ गए, तब राजा युधिष्ठिर ने ब्राह्मण से कहा-॥22॥
 
Janamejaya! Then Bhimasena worshipped him according to the rituals by offering water and water. After happily accepting the worship offered by him, when the priest sat down on the seat very comfortably, then King Yudhishthira said to the Brahmin-॥22॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)