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mahabharat 1.192.2-3: धृष्टद्युम्न बोले - "हे राजन! बड़े-बड़े लाल नेत्रों वाला, काले मृगचर्म धारण करने वाला तथा देवताओं के समान मनोहर रूप वाला वह युवा योद्धा, जिसने धनुष पर प्रत्यंचा चढ़ाकर लक्ष्य को भेदकर उसे भूमि पर गिरा दिया था, किसी के साथ न गया तथा अकेले ही बड़े वेग से आगे बढ़ा। उस समय बहुत से श्रेष्ठ ब्राह्मण उसे घेरे हुए उसकी बहुत प्रशंसा कर रहे थे। जैसे समस्त देवताओं और ऋषियों से सेवित देवराज इन्द्र दैत्यों की सेना में निर्भय होकर विचरण करते हैं, उसी प्रकार वह युवा योद्धा निर्भय होकर राजाओं के बीच से होकर चला गया॥2-3॥   |   mahabharat अध्याय 1.192: धृष्टद्युम्नके द्वारा द्रौपदी तथा पाण्डवोंका हाल सुनकर राजा द्रुपदका उनके पास पुरोहितको भेजना तथा पुरोहित और युधिष्ठिरकी बातचीत   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 192: धृष्टद्युम्नके द्वारा द्रौपदी तथा पाण्डवोंका हाल सुनकर राजा द्रुपदका उनके पास पुरोहितको भेजना तथा पुरोहित और युधिष्ठिरकी बातचीत  »  श्लोक 2-3
 
 
श्लोक  1.192.2-3 
धृष्टद्युम्न उवाच
योऽसौ युवा व्यायतलोहिताक्ष:
कृष्णाजिनी देवसमानरूप:।
य: कार्मुकाग्रॺं कृतवानधिज्यं
लक्ष्यं च य: पातितवान् पृथिव्याम्॥ २॥
असज्जमानश्च ततस्तरस्वी
वृतो द्विजाग्रॺैरभिपूज्यमान:।
चक्राम वज्रीव दिते: सुतेषु
सर्वैश्च देवै ऋषिभिश्च जुष्ट:॥ ३॥
 
 
अनुवाद
धृष्टद्युम्न बोले - "हे राजन! बड़े-बड़े लाल नेत्रों वाला, काले मृगचर्म धारण करने वाला तथा देवताओं के समान मनोहर रूप वाला वह युवा योद्धा, जिसने धनुष पर प्रत्यंचा चढ़ाकर लक्ष्य को भेदकर उसे भूमि पर गिरा दिया था, किसी के साथ न गया तथा अकेले ही बड़े वेग से आगे बढ़ा। उस समय बहुत से श्रेष्ठ ब्राह्मण उसे घेरे हुए उसकी बहुत प्रशंसा कर रहे थे। जैसे समस्त देवताओं और ऋषियों से सेवित देवराज इन्द्र दैत्यों की सेना में निर्भय होकर विचरण करते हैं, उसी प्रकार वह युवा योद्धा निर्भय होकर राजाओं के बीच से होकर चला गया॥2-3॥
 
Dhrishtadyumna said, "O King! The young warrior with big and red eyes, wearing black deerskin and having a charming appearance like a god, who had strung the bow and pierced the target and brought it down on the ground, did not accompany anyone and moved ahead alone with great speed. At that time many great Brahmins were surrounding him and praising him a lot. Just as Devraj Indra, served by all the gods and sages, moves fearlessly in the army of demons, similarly that young warrior fearlessly passed through the kings.॥2-3॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)