Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.192.18: महाराज पाण्डु राजा द्रुपद के प्राणों के समान प्रिय मित्र थे। अतः उनकी इच्छा थी कि मैं उनकी पुत्री का विवाह पाण्डुकुमार से करूँ। मैं उसे राजा पाण्डु की पुत्रवधू के रूप में समर्पित करूँगा। 18॥ | mahabharat अध्याय 1.192: धृष्टद्युम्नके द्वारा द्रौपदी तथा पाण्डवोंका हाल सुनकर राजा द्रुपदका उनके पास पुरोहितको भेजना तथा पुरोहित और युधिष्ठिरकी बातचीत । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
पाण्डुर्हि राजा द्रुपदस्य राज्ञ:
प्रिय: सखा चात्मसमो बभूव।
तस्यैष कामो दुहिता ममेयं
स्नुषां प्रदास्यामि हि कौरवाय॥ १८॥
अनुवाद
महाराज पाण्डु राजा द्रुपद के प्राणों के समान प्रिय मित्र थे। अतः उनकी इच्छा थी कि मैं उनकी पुत्री का विवाह पाण्डुकुमार से करूँ। मैं उसे राजा पाण्डु की पुत्रवधू के रूप में समर्पित करूँगा। 18॥
'Maharaja Pandu was a dear friend of King Drupada, like his soul. Therefore, it was his wish that I should marry his daughter to Pandukumar. I will dedicate her as the daughter-in-law of King Pandu. 18॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥