Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.192.17: 'तुम सब लोग विधिपूर्वक अपनी जाति और कुल का वर्णन करो, शत्रुओं के मस्तक पर अपने चरण रखो और मेरे तथा मेरे अनुयायियों सहित पांचालराज के हृदय को प्रसन्न करो।॥ 17॥ | mahabharat अध्याय 1.192: धृष्टद्युम्नके द्वारा द्रौपदी तथा पाण्डवोंका हाल सुनकर राजा द्रुपदका उनके पास पुरोहितको भेजना तथा पुरोहित और युधिष्ठिरकी बातचीत । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
आख्यात च ज्ञातिकुलानुपूर्वीं
पदं शिरस्सु द्विषतां कुरुध्वम्।
प्रह्लादयध्वं हृदयं ममेदं
पाञ्चालराजस्य च सानुगस्य॥ १७॥
अनुवाद
'तुम सब लोग विधिपूर्वक अपनी जाति और कुल का वर्णन करो, शत्रुओं के मस्तक पर अपने चरण रखो और मेरे तथा मेरे अनुयायियों सहित पांचालराज के हृदय को प्रसन्न करो।॥ 17॥
'You all should describe your caste and clan as per the rituals, place your feet on the foreheads of your enemies and bring joy to the heart of the King of Panchala along with me and my followers.॥ 17॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥