Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.192.12: राजन! जिस प्रकार उन्होंने युद्ध का वर्णन किया है, उससे यह मानने में कोई संदेह नहीं रह जाता कि वे क्षत्रियों में श्रेष्ठ हैं। हमने सुना है कि कुन्ती के पुत्र लाक्षागृह की अग्नि में जलने से बच गए थे। अतः पाण्डवों से सम्बन्ध स्थापित करने की जो इच्छा हमारे मन में थी, वह अवश्य पूरी हुई प्रतीत होती है॥12॥ | mahabharat अध्याय 1.192: धृष्टद्युम्नके द्वारा द्रौपदी तथा पाण्डवोंका हाल सुनकर राजा द्रुपदका उनके पास पुरोहितको भेजना तथा पुरोहित और युधिष्ठिरकी बातचीत । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
नि:संशयं क्षत्रियपुङ्गवास्ते
यथा हि युद्धं कथयन्ति राजन्।
आशा हि नो व्यक्तमियं समृद्धा
मुक्तान् हि पार्थाञ्छृणुमोऽग्निदाहात्॥ १२॥
अनुवाद
राजन! जिस प्रकार उन्होंने युद्ध का वर्णन किया है, उससे यह मानने में कोई संदेह नहीं रह जाता कि वे क्षत्रियों में श्रेष्ठ हैं। हमने सुना है कि कुन्ती के पुत्र लाक्षागृह की अग्नि में जलने से बच गए थे। अतः पाण्डवों से सम्बन्ध स्थापित करने की जो इच्छा हमारे मन में थी, वह अवश्य पूरी हुई प्रतीत होती है॥12॥
King! The way they described the war, there is no doubt left in accepting that they are the best of the Kshatriyas. We have heard that Kunti's sons were saved from burning in the fire of Lakhshagriha. Therefore, the desire we had in our mind to establish relations with the Pandavas, it seems that it has definitely been fulfilled.॥ 12॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥