Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.192.11: सोते समय वे वर्षा ऋतु में बादलों की भाँति गर्जना करते हुए विचित्र प्रकार से आपस में बातें करने लगे। ये पाँचों वीर जो बातें कह रहे थे, वे वैश्यों, शूद्रों और ब्राह्मणों जैसी नहीं थीं। | mahabharat अध्याय 1.192: धृष्टद्युम्नके द्वारा द्रौपदी तथा पाण्डवोंका हाल सुनकर राजा द्रुपदका उनके पास पुरोहितको भेजना तथा पुरोहित और युधिष्ठिरकी बातचीत । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
ते नर्दमाना इव कालमेघा:
कथा विचित्रा: कथयाम्बभूवु:।
न वैश्यशूद्रौपयिकी: कथास्ता
न च द्विजानां कथयन्ति वीरा:॥ ११॥
अनुवाद
सोते समय वे वर्षा ऋतु में बादलों की भाँति गर्जना करते हुए विचित्र प्रकार से आपस में बातें करने लगे। ये पाँचों वीर जो बातें कह रहे थे, वे वैश्यों, शूद्रों और ब्राह्मणों जैसी नहीं थीं।
While sleeping, they started talking to each other in a very strange manner while roaring like the clouds during the rainy season. The things that these five brave men were saying were not like those of Vaishyas, Shudras and Brahmins.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥