Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.191.5: 'और अपने आस-पास रहने वाले और जिन्हें भोजन की आवश्यकता है, उन्हें भोजन कराओ। फिर बचे हुए भोजन को इस प्रकार शीघ्रता से बाँट दो। आधा भोजन एक व्यक्ति के लिए रखो, फिर बचे हुए भोजन के छह भाग करो और चार भाग चार भाइयों के लिए अलग-अलग रखो। उसके बाद एक-एक भाग मेरे और अपने लिए अलग-अलग परोस दो।॥5॥ | mahabharat अध्याय 1.191: धृष्टद्युम्नका गुप्तरूपसे वहाँका सब हाल देखकर राजा द्रुपदके पास आना तथा द्रौपदीके विषयमें द्रुपदका प्रश्न । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
ये चान्नमिच्छन्ति ददस्व तेभ्य:
परिश्रिता ये परितो मनुष्या:।
ततश्च शेषं प्रविभज्य शीघ्र-
मर्धं चतुर्धा मम चात्मनश्च॥ ५॥
अनुवाद
'और अपने आस-पास रहने वाले और जिन्हें भोजन की आवश्यकता है, उन्हें भोजन कराओ। फिर बचे हुए भोजन को इस प्रकार शीघ्रता से बाँट दो। आधा भोजन एक व्यक्ति के लिए रखो, फिर बचे हुए भोजन के छह भाग करो और चार भाग चार भाइयों के लिए अलग-अलग रखो। उसके बाद एक-एक भाग मेरे और अपने लिए अलग-अलग परोस दो।॥5॥
‘And serve food to other people who live around you and need food. Then divide the remaining food quickly in this manner. Keep half of the food for one person, then divide the remaining food into six parts and keep four parts separately for four brothers. After that serve one part separately for me and yourself.॥ 5॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥