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mahabharat 1.191.4: तब दानवीर कुन्ती ने द्रौपदी से कहा, 'हे सुहागिन! भोजन का पहला भाग देवताओं को अर्पण करके ब्राह्मण को दान दे दो।'   |   mahabharat अध्याय 1.191: धृष्टद्युम्नका गुप्तरूपसे वहाँका सब हाल देखकर राजा द्रुपदके पास आना तथा द्रौपदीके विषयमें द्रुपदका प्रश्न   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 191: धृष्टद्युम्नका गुप्तरूपसे वहाँका सब हाल देखकर राजा द्रुपदके पास आना तथा द्रौपदीके विषयमें द्रुपदका प्रश्न  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  1.191.4 
ततस्तु कुन्ती द्रुपदात्मजां ता-
मुवाच काले वचनं वदान्या।
त्वमग्रमादाय कुरुष्व भद्रे
बलिं च विप्राय च देहि भिक्षाम्॥ ४॥
 
 
अनुवाद
तब दानवीर कुन्ती ने द्रौपदी से कहा, 'हे सुहागिन! भोजन का पहला भाग देवताओं को अर्पण करके ब्राह्मण को दान दे दो।'
 
Then the generous Kunti said to Draupadi, 'Good lady! Take the first portion of the food and offer it as a sacrifice to the gods and give alms to a Brahmin.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)