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mahabharat 1.191.1: वैशम्पायन कहते हैं: जनमेजय! जब कुरुनन्दन के पुत्र भीमसेन और अर्जुन कुम्हार के घर जा रहे थे, तो पांचाल राजकुमार धृष्टद्युम्न ने गुप्त रूप से उनका पीछा किया।॥ 1॥   |   mahabharat अध्याय 1.191: धृष्टद्युम्नका गुप्तरूपसे वहाँका सब हाल देखकर राजा द्रुपदके पास आना तथा द्रौपदीके विषयमें द्रुपदका प्रश्न   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 191: धृष्टद्युम्नका गुप्तरूपसे वहाँका सब हाल देखकर राजा द्रुपदके पास आना तथा द्रौपदीके विषयमें द्रुपदका प्रश्न  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  1.191.1 
वैशम्पायन उवाच
धृष्टद्युम्नस्तु पाञ्चाल्य: पृष्ठत: कुरुनन्दनौ।
अन्वगच्छत् तदा यान्तौ भार्गवस्य निवेशने॥ १॥
 
 
अनुवाद
वैशम्पायन कहते हैं: जनमेजय! जब कुरुनन्दन के पुत्र भीमसेन और अर्जुन कुम्हार के घर जा रहे थे, तो पांचाल राजकुमार धृष्टद्युम्न ने गुप्त रूप से उनका पीछा किया।॥ 1॥
 
Vaishmpayana says: Janamejaya! When Kuruṇḍana's son Bhimasena and Arjuna were going to the potter's house, the Panchala prince Dhrishtadyumna followed them secretly.॥ 1॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)