Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.190.6: वैशम्पायनजी कहते हैं - हे राजन! महारथी कौरवराज युधिष्ठिर बड़े बुद्धिमान थे। अपनी माता के वचन सुनकर उन्होंने कुछ देर तक विचार किया। फिर कुन्तीदेवी को पूर्ण आश्वासन देकर उन्होंने धनंजय से यह कहा -॥6॥ | mahabharat अध्याय 1.190: कुन्ती, अर्जुन और युधिष्ठिरकी बातचीत, पाँचों पाण्डवोंका द्रौपदीके साथ विवाहका विचार तथा बलराम और श्रीकृष्णकी पाण्डवोंसे भेंट । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
वैशम्पायन उवाच
स एवमुक्तो मतिमान् नृवीरो
मात्रा मुहूर्तं तु विचिन्त्य राजा।
कुन्तीं समाश्वास्य कुरुप्रवीरो
धनंजयं वाक्यमिदं बभाषे॥ ६॥
अनुवाद
वैशम्पायनजी कहते हैं - हे राजन! महारथी कौरवराज युधिष्ठिर बड़े बुद्धिमान थे। अपनी माता के वचन सुनकर उन्होंने कुछ देर तक विचार किया। फिर कुन्तीदेवी को पूर्ण आश्वासन देकर उन्होंने धनंजय से यह कहा -॥6॥
Vaishampayana says - O King! The great warrior king of Kurus, Yudhishthira, was very intelligent. After listening to his mother's words, he thought about it for a while. Then, after giving full assurance to Kuntidevi, he said this to Dhananjay -॥ 6॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥