Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.190.5: हे कुरुश्रेष्ठ! मुझे बताइए, मेरी बात कैसे झूठी न हो? और ऐसा क्या किया जाए कि इस पांचाल राजकुमारी कृष्णा को पाप न लगे और उसे नीच योनियों में भटकना न पड़े॥5॥ | mahabharat अध्याय 1.190: कुन्ती, अर्जुन और युधिष्ठिरकी बातचीत, पाँचों पाण्डवोंका द्रौपदीके साथ विवाहका विचार तथा बलराम और श्रीकृष्णकी पाण्डवोंसे भेंट । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
मया कथं नानृतमुक्तमद्य
भवेत् कुरूणामृषभ ब्रवीहि।
पाञ्चालराजस्य सुतामधर्मो
न चोपवर्तेत न विभ्रमेच्च॥ ५॥
अनुवाद
हे कुरुश्रेष्ठ! मुझे बताइए, मेरी बात कैसे झूठी न हो? और ऐसा क्या किया जाए कि इस पांचाल राजकुमारी कृष्णा को पाप न लगे और उसे नीच योनियों में भटकना न पड़े॥5॥
O best of the Kurus! Tell me, how can my words not prove false? And what should be done so that this Panchala princess Krishna does not incur sins and does not have to wander in low births. ॥ 5॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥