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mahabharat 1.190.4: कुंती बोली, "बेटा! यह राजा द्रुपद की पुत्री द्रौपदी है। तुम्हारे छोटे भाई भीमसेन और अर्जुन ने इसे मुझे भिक्षा के रूप में दिया था और मैंने भी (इसे देखे बिना) भूल से (इसे भिक्षा समझकर) कहा था - 'तुम सब लोग मिलकर इसे प्राप्त करो।'   |   mahabharat अध्याय 1.190: कुन्ती, अर्जुन और युधिष्ठिरकी बातचीत, पाँचों पाण्डवोंका द्रौपदीके साथ विवाहका विचार तथा बलराम और श्रीकृष्णकी पाण्डवोंसे भेंट   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 190: कुन्ती, अर्जुन और युधिष्ठिरकी बातचीत, पाँचों पाण्डवोंका द्रौपदीके साथ विवाहका विचार तथा बलराम और श्रीकृष्णकी पाण्डवोंसे भेंट  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  1.190.4 
कुन्त्युवाच
इयं तु कन्या द्रुपदस्य राज्ञ:
तवानुजाभ्यां मयि संनिविष्टा।
यथोचितं पुत्र मयापि चोक्तं
समेत्य भुङ्‍‍क्तिति नृप प्रमादात्॥ ४॥
 
 
अनुवाद
कुंती बोली, "बेटा! यह राजा द्रुपद की पुत्री द्रौपदी है। तुम्हारे छोटे भाई भीमसेन और अर्जुन ने इसे मुझे भिक्षा के रूप में दिया था और मैंने भी (इसे देखे बिना) भूल से (इसे भिक्षा समझकर) कहा था - 'तुम सब लोग मिलकर इसे प्राप्त करो।'
 
Kunti said, "Son, this is Draupadi, daughter of King Drupada. Your younger brothers Bhimasena and Arjuna presented it to me as alms and I too (without seeing it) mistakenly replied accordingly (thinking it to be alms) - 'All of you get it together.'
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)