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mahabharat 1.190.3: कुन्तीदेवी अन्याय के भय से अत्यन्त चिन्तित हो गईं; (परन्तु द्रौपदी अपनी इच्छानुसार पति पाकर अत्यन्त प्रसन्न थीं) कुन्तीदेवी द्रौपदी का हाथ पकड़कर युधिष्ठिर के पास गईं और उनसे यह कहा -॥3॥   |   mahabharat अध्याय 1.190: कुन्ती, अर्जुन और युधिष्ठिरकी बातचीत, पाँचों पाण्डवोंका द्रौपदीके साथ विवाहका विचार तथा बलराम और श्रीकृष्णकी पाण्डवोंसे भेंट   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 190: कुन्ती, अर्जुन और युधिष्ठिरकी बातचीत, पाँचों पाण्डवोंका द्रौपदीके साथ विवाहका विचार तथा बलराम और श्रीकृष्णकी पाण्डवोंसे भेंट  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  1.190.3 
साधर्मभीता परिचिन्तयन्ती
तां याज्ञसेनीं परमप्रतीताम्।
पाणौ गृहीत्वोपजगाम कुन्ती
युधिष्ठिरं वाक्यमुवाच चेदम्॥ ३॥
 
 
अनुवाद
कुन्तीदेवी अन्याय के भय से अत्यन्त चिन्तित हो गईं; (परन्तु द्रौपदी अपनी इच्छानुसार पति पाकर अत्यन्त प्रसन्न थीं) कुन्तीदेवी द्रौपदी का हाथ पकड़कर युधिष्ठिर के पास गईं और उनसे यह कहा -॥3॥
 
Kuntidevi became very worried due to the fear of injustice; (but Draupadi was very happy on getting a husband of her choice). Kuntidevi went to Yudhishthira holding the hand of Draupadi and told him this -॥ 3॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)