श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 190: कुन्ती, अर्जुन और युधिष्ठिरकी बातचीत, पाँचों पाण्डवोंका द्रौपदीके साथ विवाहका विचार तथा बलराम और श्रीकृष्णकी पाण्डवोंसे भेंट  »  श्लोक 24
 
 
श्लोक  1.190.24 
दिष्टॺा सर्वे पावकाद् विप्रमुक्ता
यूयं घोरात् पाण्डवा: शत्रुसाहा:।
दिष्टॺा पापो धृतराष्ट्रस्य पुत्र:
सहामात्यो न सकामोऽभविष्यत्॥ २४॥
 
 
अनुवाद
'यह बड़े सौभाग्य की बात है कि शत्रुओं का सामना करने की शक्ति रखने वाले आप सभी पाण्डव उस भयंकर अग्नि से बच गए। यह भी सौभाग्य की बात है कि पापी धृतराष्ट्रपुत्र दुर्योधन अपने मन्त्रियों सहित इस षड्यन्त्र में सफल नहीं हो सका॥ 24॥
 
‘It is a matter of great fortune that all of you Pandavas, who have the strength to face the enemies, survived that terrible fire. It is also a matter of good fortune that the sinful Dhritarashtra's son Duryodhana, along with his ministers, could not succeed in this conspiracy.॥ 24॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)