Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.190.23: तब भगवान वासुदेव ने मुस्कुराते हुए उत्तर दिया, 'हे राजन! अग्नि चाहे कितनी भी छिपी हुई क्यों न हो, उसे पहचाना जा सकता है। पाण्डवों के अतिरिक्त मनुष्यों में ऐसा अद्भुत कार्य कौन कर सकता है?' | mahabharat अध्याय 1.190: कुन्ती, अर्जुन और युधिष्ठिरकी बातचीत, पाँचों पाण्डवोंका द्रौपदीके साथ विवाहका विचार तथा बलराम और श्रीकृष्णकी पाण्डवोंसे भेंट । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
तब भगवान वासुदेव ने मुस्कुराते हुए उत्तर दिया, 'हे राजन! अग्नि चाहे कितनी भी छिपी हुई क्यों न हो, उसे पहचाना जा सकता है। पाण्डवों के अतिरिक्त मनुष्यों में ऐसा अद्भुत कार्य कौन कर सकता है?'
Then Lord Vasudeva replied smilingly, 'O King! No matter how hidden the fire is, it can be recognized. Besides the Pandavas, who among the humans can perform such a wonderful deed?
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥