श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 190: कुन्ती, अर्जुन और युधिष्ठिरकी बातचीत, पाँचों पाण्डवोंका द्रौपदीके साथ विवाहका विचार तथा बलराम और श्रीकृष्णकी पाण्डवोंसे भेंट  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  1.190.22 
अजातशत्रुश्च कुरुप्रवीर:
पप्रच्छ कृष्णं कुशलं विलोक्य।
कथं वयं वासुदेव त्वयेह
गूढा वसन्तो विदिताश्च सर्वे॥ २२॥
 
 
अनुवाद
कुरुवंश के सबसे बड़े योद्धा अजातशत्रु युधिष्ठिर ने श्रीकृष्ण को देखकर उनका कुशलक्षेम पूछा और बोले - 'वासुदेवनन्दन! हम लोग यहाँ छिपे रहते हैं, फिर आपने हम सबको कैसे पहचान लिया?'॥22॥
 
Yudhishthira, the greatest warrior of the Kuru clan, Ajatashatru, on seeing Shri Krishna, asked about his well-being and said - 'Vasudevanandan! We live hidden here, then how did you recognize all of us?'॥ 22॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)