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mahabharat 1.190.21: उनके साथ बलराम ने भी (अपना नाम बताकर) उनके चरण स्पर्श किए। पाण्डव भी उन दोनों को देखकर अत्यन्त प्रसन्न हुए। हे जनमेजय! फिर उन वीर यदुओं ने अपनी बुआ कुन्ती के भी चरण स्पर्श किए।   |   mahabharat अध्याय 1.190: कुन्ती, अर्जुन और युधिष्ठिरकी बातचीत, पाँचों पाण्डवोंका द्रौपदीके साथ विवाहका विचार तथा बलराम और श्रीकृष्णकी पाण्डवोंसे भेंट   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 190: कुन्ती, अर्जुन और युधिष्ठिरकी बातचीत, पाँचों पाण्डवोंका द्रौपदीके साथ विवाहका विचार तथा बलराम और श्रीकृष्णकी पाण्डवोंसे भेंट  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  1.190.21 
तथैव तस्याप्यनु रौहिणेय-
स्तौ चापि हृष्टा: कुरवोऽभ्यनन्दन्।
पितृष्वसुश्चापि यदुप्रवीरा-
वगृह्णतां भारतमुख्य पादौ॥ २१॥
 
 
अनुवाद
उनके साथ बलराम ने भी (अपना नाम बताकर) उनके चरण स्पर्श किए। पाण्डव भी उन दोनों को देखकर अत्यन्त प्रसन्न हुए। हे जनमेजय! फिर उन वीर यदुओं ने अपनी बुआ कुन्ती के भी चरण स्पर्श किए।
 
Along with them, Balarama also touched their feet (by telling his name). The Pandavas too were very happy to see them both. O Janamejaya! Then those brave warriors of Yadu touched the feet of their aunt Kunti too.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)