Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.190.2: उस समय कुँती देवी कुटिया के अंदर थीं। उन्होंने अपने पुत्रों की ओर देखे बिना ही कहा, "यदि तुम लोग भिक्षा लाए हो, तो तुम सब भाई मिलकर उसे ग्रहण करो।" तब द्रौपदी की ओर देखकर कुँती चिंतित हो गईं और बोलीं, "हाय! मेरे मुँह से बहुत अनुचित बात निकल गई।" | mahabharat अध्याय 1.190: कुन्ती, अर्जुन और युधिष्ठिरकी बातचीत, पाँचों पाण्डवोंका द्रौपदीके साथ विवाहका विचार तथा बलराम और श्रीकृष्णकी पाण्डवोंसे भेंट । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
उस समय कुँती देवी कुटिया के अंदर थीं। उन्होंने अपने पुत्रों की ओर देखे बिना ही कहा, "यदि तुम लोग भिक्षा लाए हो, तो तुम सब भाई मिलकर उसे ग्रहण करो।" तब द्रौपदी की ओर देखकर कुँती चिंतित हो गईं और बोलीं, "हाय! मेरे मुँह से बहुत अनुचित बात निकल गई।"
At that time Kunti Devi was inside the hut. Without looking at her sons, she replied, "If you have brought alms, all of you brothers may get it together." Then, looking at Draupadi, Kunti became worried and said, "Alas! A very inappropriate thing came out of my mouth."
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥