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काम्यं हि रूपं पाञ्चाल्या विधात्रा विहितं स्वयम्।
बभूवाधिकमन्याभ्य: सर्वभूतमनोहरम्॥ १४॥
अनुवाद
विधाता ने स्वयं पांचाली का सुंदर रूप रचा और उसे सुशोभित किया था। वह संसार की किसी भी अन्य स्त्री से कहीं अधिक आकर्षक थी और सभी प्राणियों के हृदय को मोहित कर लेती थी।
The Creator himself had created and adorned the beautiful form of Panchali. She was far more attractive than any other woman in the world and captivated the hearts of all beings.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥