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mahabharat 1.190.13: द्रुपदकुमारी के देखते ही उन सुशील और तेजस्वी पाण्डुपुत्रों की सारी इन्द्रियाँ मंथनित हो गईं और मन्मथ प्रकट हो गया ॥13॥   |   mahabharat अध्याय 1.190: कुन्ती, अर्जुन और युधिष्ठिरकी बातचीत, पाँचों पाण्डवोंका द्रौपदीके साथ विवाहका विचार तथा बलराम और श्रीकृष्णकी पाण्डवोंसे भेंट   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 190: कुन्ती, अर्जुन और युधिष्ठिरकी बातचीत, पाँचों पाण्डवोंका द्रौपदीके साथ विवाहका विचार तथा बलराम और श्रीकृष्णकी पाण्डवोंसे भेंट  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  1.190.13 
तेषां तु द्रौपदीं दृष्ट्वा सर्वेषाममितौजसाम्।
सम्प्रमथ्येन्द्रियग्रामं प्रादुरासीन्मनोभव:॥ १३॥
 
 
अनुवाद
द्रुपदकुमारी के देखते ही उन सुशील और तेजस्वी पाण्डुपुत्रों की सारी इन्द्रियाँ मंथनित हो गईं और मन्मथ प्रकट हो गया ॥13॥
 
As soon as Drupadakumari looked at him, all the senses of those amiable and brilliant sons of Pandu were churned and Manmatha was manifested. 13॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)