Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.190.12: यशस्विनी कृष्ण भी उन सबको देख रही थीं। वहाँ बैठे हुए पाण्डवों ने पहले द्रौपदी की ओर देखा, फिर एक-दूसरे की ओर और सभी ने द्रुपद की राजकुमारी को अपने हृदय में धारण कर लिया॥12॥ | mahabharat अध्याय 1.190: कुन्ती, अर्जुन और युधिष्ठिरकी बातचीत, पाँचों पाण्डवोंका द्रौपदीके साथ विवाहका विचार तथा बलराम और श्रीकृष्णकी पाण्डवोंसे भेंट । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
दृष्ट्वा ते तत्र पश्यन्तीं सर्वे कृष्णां यशस्विनीम्।
सम्प्रेक्ष्यान्योन्यमासीना हृदयैस्तामधारयन्॥ १२॥
अनुवाद
यशस्विनी कृष्ण भी उन सबको देख रही थीं। वहाँ बैठे हुए पाण्डवों ने पहले द्रौपदी की ओर देखा, फिर एक-दूसरे की ओर और सभी ने द्रुपद की राजकुमारी को अपने हृदय में धारण कर लिया॥12॥
Yashaswini Krishna was also watching them all. The Pandavas sitting there looked at Draupadi and then at each other and everyone kept the princess of Drupada in their hearts.॥12॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥