श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 190: कुन्ती, अर्जुन और युधिष्ठिरकी बातचीत, पाँचों पाण्डवोंका द्रौपदीके साथ विवाहका विचार तथा बलराम और श्रीकृष्णकी पाण्डवोंसे भेंट  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  1.190.11 
वैशम्पायन उवाच
जिष्णोर्वचनमाज्ञाय भक्तिस्नेहसमन्वितम्।
दृष्टिं निवेशयामासु: पाञ्चाल्यां पाण्डुनन्दना:॥ ११॥
 
 
अनुवाद
वैशम्पायनजी कहते हैं - अर्जुन के ये भक्तिपूर्ण और स्नेहपूर्ण वचन सुनकर सभी पाण्डवों ने पांचाल राजकुमारी द्रौपदी की ओर देखा॥11॥
 
Vaishampayanji says - After hearing these devotional and affectionate words of Arjuna, all the Pandavas looked towards Panchal princess Draupadi. 11॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)