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mahabharat 1.190.10: ऐसी स्थिति में आप अपनी बुद्धि से विचार करके जो कुछ धर्म और यश के अनुकूल हो तथा पांचाल नरेश के लिए भी हितकर हो, वैसा ही करें और हमें उसकी आज्ञा दें। हम सब आपके अधीन हैं॥10॥   |   mahabharat अध्याय 1.190: कुन्ती, अर्जुन और युधिष्ठिरकी बातचीत, पाँचों पाण्डवोंका द्रौपदीके साथ विवाहका विचार तथा बलराम और श्रीकृष्णकी पाण्डवोंसे भेंट   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 190: कुन्ती, अर्जुन और युधिष्ठिरकी बातचीत, पाँचों पाण्डवोंका द्रौपदीके साथ विवाहका विचार तथा बलराम और श्रीकृष्णकी पाण्डवोंसे भेंट  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  1.190.10 
एवं गते यत् करणीयमत्र
धर्म्यं यशस्यं कुरु तद् विचिन्त्य।
पाञ्चालराजस्य हितं च यत् स्यात्
प्रशाधि सर्वेस्म वशे स्थितास्ते॥ १०॥
 
 
अनुवाद
ऐसी स्थिति में आप अपनी बुद्धि से विचार करके जो कुछ धर्म और यश के अनुकूल हो तथा पांचाल नरेश के लिए भी हितकर हो, वैसा ही करें और हमें उसकी आज्ञा दें। हम सब आपके अधीन हैं॥10॥
 
In such a situation, you should think with your wisdom and do whatever is in accordance with Dharma and fame and is also beneficial for the Panchal King and give us orders for that. We all are under your control.॥10॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)