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mahabharat 1.189.5: तत्पश्चात् युद्ध में उन्मत्त कर्ण आदि क्षत्रियों को आते देख दोनों भाई निर्भय होकर उन पर टूट पड़े, जैसे दो (मत्त) हाथी अपने-अपने विरोधी हाथियों की ओर बढ़ रहे हों॥5॥   |   mahabharat अध्याय 1.189: अर्जुन और भीमसेनके द्वारा कर्ण तथा शल्यकी पराजय और द्रौपदीसहित भीम-अर्जुनका अपने डेरेपर जाना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 189: अर्जुन और भीमसेनके द्वारा कर्ण तथा शल्यकी पराजय और द्रौपदीसहित भीम-अर्जुनका अपने डेरेपर जाना  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  1.189.5 
तत: कर्णमुखान् दृष्ट्वा क्षत्रियान् युद्धदुर्मदान्।
सम्पेततुरभीतौ तौ गजौ प्रतिगजानिव॥ ५॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् युद्ध में उन्मत्त कर्ण आदि क्षत्रियों को आते देख दोनों भाई निर्भय होकर उन पर टूट पड़े, जैसे दो (मत्त) हाथी अपने-अपने विरोधी हाथियों की ओर बढ़ रहे हों॥5॥
 
Thereafter, seeing the battle-crazed Kshatriyas like Karna etc. approaching, both the brothers fearlessly attacked them like two (intoxicated) elephants moving towards their opposing elephants. ॥ 5॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)