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mahabharat 1.188.d1-d2: युद्धस्थल में पाण्डुपुत्र अर्जुन के प्रति राजाओं का क्रोध प्रकट करते हुए सुनकर, अर्जुन का बल जानकर, चक्रधारी भगवान श्रीकृष्ण ने बलरामजी से कहा, "भैया! तुम्हें डरना नहीं चाहिए। यदि बहुत से देवता और दानव एकत्र हो जाएँ, तो भीमसेन का छोटा भाई कुन्तीकुमार अर्जुन अकेले ही उन सबके साथ युद्ध करने में समर्थ है। फिर इन मनुष्य राजाओं को जीतना कोई बड़ी बात नहीं है। यदि धर्मात्मा अर्जुन हमारी सहायता लेना चाहें, तो हम इसके लिए प्रयत्न करेंगे। वीर! मुझे विश्वास है कि पाण्डुपुत्र अर्जुन को कोई नहीं हरा सकता।"   |   mahabharat अध्याय 1.188: द्रुपदको मारनेके लिये उद्यत हुए राजाओंका सामना करनेके लिये भीम और अर्जुनका उद्यत होना और उनके विषयमें भगवान् श्रीकृष्णका बलरामजीसे वार्तालाप   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 188: द्रुपदको मारनेके लिये उद्यत हुए राजाओंका सामना करनेके लिये भीम और अर्जुनका उद्यत होना और उनके विषयमें भगवान् श्रीकृष्णका बलरामजीसे वार्तालाप  »  श्लोक d1-d2
 
 
श्लोक  1.188.d1-d2 
(यथा नृपा: पाण्डवमाजिमध्ये
तं प्राब्रवीच्चक्रधरो हलायुधम्।
बलं विजानन् पुरुषोत्तमस्तदा
न कार्यमार्येण च सम्भ्रमस्त्वया॥
भीमानुजो योधयितुं समर्थ
एको हि पार्थ: ससुरासुरान् बहून्।
अलं विजेतुं किमु मानुषान् नृपान्
साहाय्यमस्मान् यदि सव्यसाची।
स वाञ्छति स्म प्रयताम वीर
पराभव: पाण्डुसुते न चास्ति॥ )
 
 
अनुवाद
युद्धस्थल में पाण्डुपुत्र अर्जुन के प्रति राजाओं का क्रोध प्रकट करते हुए सुनकर, अर्जुन का बल जानकर, चक्रधारी भगवान श्रीकृष्ण ने बलरामजी से कहा, "भैया! तुम्हें डरना नहीं चाहिए। यदि बहुत से देवता और दानव एकत्र हो जाएँ, तो भीमसेन का छोटा भाई कुन्तीकुमार अर्जुन अकेले ही उन सबके साथ युद्ध करने में समर्थ है। फिर इन मनुष्य राजाओं को जीतना कोई बड़ी बात नहीं है। यदि धर्मात्मा अर्जुन हमारी सहायता लेना चाहें, तो हम इसके लिए प्रयत्न करेंगे। वीर! मुझे विश्वास है कि पाण्डुपुत्र अर्जुन को कोई नहीं हरा सकता।"
 
Hearing the kings expressing their anger towards Arjuna, son of Pandu, on the battlefield, knowing Arjuna's strength, the Supreme Lord Krishna, the chakradhari, said to Balramji, "Brother! You should not be afraid. Even if many gods and demons gather, Kuntikumar Arjuna, younger brother of Bhima, is capable of fighting with them all alone. Then it is not a big deal to win over these human kings. If Arjuna, the virtuous one, wants to take our help, we will try for it. Braveheart! I am confident that Arjuna, son of Pandu, cannot be defeated."
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)