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mahabharat 1.188.7: ब्राह्मणों को स्वयंवर में कन्या द्वारा वरण करने का अधिकार नहीं है। (लोगों में) यह प्रसिद्ध है कि स्वयंवर केवल क्षत्रियों के लिए होता है।॥7॥   |   mahabharat अध्याय 1.188: द्रुपदको मारनेके लिये उद्यत हुए राजाओंका सामना करनेके लिये भीम और अर्जुनका उद्यत होना और उनके विषयमें भगवान् श्रीकृष्णका बलरामजीसे वार्तालाप   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 188: द्रुपदको मारनेके लिये उद्यत हुए राजाओंका सामना करनेके लिये भीम और अर्जुनका उद्यत होना और उनके विषयमें भगवान् श्रीकृष्णका बलरामजीसे वार्तालाप  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  1.188.7 
न च विप्रेष्वधीकारो विद्यते वरणं प्रति।
स्वयंवर: क्षत्रियाणामितीयं प्रथिता श्रुति:॥ ७॥
 
 
अनुवाद
ब्राह्मणों को स्वयंवर में कन्या द्वारा वरण करने का अधिकार नहीं है। (लोगों में) यह प्रसिद्ध है कि स्वयंवर केवल क्षत्रियों के लिए होता है।॥7॥
 
‘Brahmins do not have the right to be chosen by a girl in a swayamvar. It is well known (among people) that swayamvar is held only for kshatriyas.॥ 7॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)