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mahabharat 1.188.6: 'देवगण के समान उत्तम आचरणों से सुशोभित इस राजाओं के समूह में क्या उसने अपनी पुत्री के योग्य कोई राजा नहीं देखा?॥6॥   |   mahabharat अध्याय 1.188: द्रुपदको मारनेके लिये उद्यत हुए राजाओंका सामना करनेके लिये भीम और अर्जुनका उद्यत होना और उनके विषयमें भगवान् श्रीकृष्णका बलरामजीसे वार्तालाप   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 188: द्रुपदको मारनेके लिये उद्यत हुए राजाओंका सामना करनेके लिये भीम और अर्जुनका उद्यत होना और उनके विषयमें भगवान् श्रीकृष्णका बलरामजीसे वार्तालाप  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  1.188.6 
अस्मिन् राजसमावाये देवानामिव संनये।
किमयं सदृशं कञ्चिन्नृपतिं नैव दृष्टवान्॥ ६॥
 
 
अनुवाद
'देवगण के समान उत्तम आचरणों से सुशोभित इस राजाओं के समूह में क्या उसने अपनी पुत्री के योग्य कोई राजा नहीं देखा?॥6॥
 
'In this group of kings, adorned with good morals like the group of gods, has he not seen any king worthy of his daughter?॥ 6॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)