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mahabharat 1.188.4: 'राजा द्रुपद अपने गुणों के कारण बड़ों के आदर के पात्र नहीं हैं। हमें राजाओं से द्वेष रखने वाले इस दुष्ट को उसके पुत्र सहित मार डालना चाहिए।॥4॥   |   mahabharat अध्याय 1.188: द्रुपदको मारनेके लिये उद्यत हुए राजाओंका सामना करनेके लिये भीम और अर्जुनका उद्यत होना और उनके विषयमें भगवान् श्रीकृष्णका बलरामजीसे वार्तालाप   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 188: द्रुपदको मारनेके लिये उद्यत हुए राजाओंका सामना करनेके लिये भीम और अर्जुनका उद्यत होना और उनके विषयमें भगवान् श्रीकृष्णका बलरामजीसे वार्तालाप  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  1.188.4 
न ह्यर्हत्येष सम्मानं नापि वृद्धक्रमं गुणै:।
हन्मैनं सह पुत्रेण दुराचारं नृपद्विषम्॥ ४॥
 
 
अनुवाद
'राजा द्रुपद अपने गुणों के कारण बड़ों के आदर के पात्र नहीं हैं। हमें राजाओं से द्वेष रखने वाले इस दुष्ट को उसके पुत्र सहित मार डालना चाहिए।॥4॥
 
'King Drupada does not deserve to receive the respect due to his elders because of his qualities. We should kill this wicked man who hates kings along with his son.॥ 4॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)