Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 1.188.24: जलरहित मेघ के समान गौर वर्ण वाले हलधर (बलराम) ने अपने छोटे भाई श्रीकृष्ण की बात पर विश्वास करके उनसे कहा - 'भैया! मैं अपनी बुआ कुन्ती को कुरुवंश के श्रेष्ठ योद्धा पाण्डवों सहित लाक्षागृह से बचा हुआ देखकर बहुत प्रसन्न हूँ।'   |   mahabharat अध्याय 1.188: द्रुपदको मारनेके लिये उद्यत हुए राजाओंका सामना करनेके लिये भीम और अर्जुनका उद्यत होना और उनके विषयमें भगवान् श्रीकृष्णका बलरामजीसे वार्तालाप   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 188: द्रुपदको मारनेके लिये उद्यत हुए राजाओंका सामना करनेके लिये भीम और अर्जुनका उद्यत होना और उनके विषयमें भगवान् श्रीकृष्णका बलरामजीसे वार्तालाप  »  श्लोक 24
 
 
श्लोक  1.188.24 
तमब्रवीन्निर्जलतोयदाभो
हलायुधोऽनन्तरजं प्रतीत:।
प्रीतोऽस्मि दृष्ट्वा हि पितृष्वसारं
पृथां विमुक्तां सह कौरवाग्रॺै:॥ २४॥
 
 
अनुवाद
जलरहित मेघ के समान गौर वर्ण वाले हलधर (बलराम) ने अपने छोटे भाई श्रीकृष्ण की बात पर विश्वास करके उनसे कहा - 'भैया! मैं अपनी बुआ कुन्ती को कुरुवंश के श्रेष्ठ योद्धा पाण्डवों सहित लाक्षागृह से बचा हुआ देखकर बहुत प्रसन्न हूँ।'
 
Haldhar (Balram), who had fair complexion like a waterless cloud, believed his younger brother Shri Krishna and said to him - 'Brother! I am very happy to see my aunt Kunti saved from Lakhshagriha along with the Pandavas, the best warriors of the Kuru clan.'
 
इति श्रीमहाभारते आदिपर्वणि स्वयंवरपर्वणि कृष्णवाक्ये अष्टाशीत्यधिकशततमोऽध्याय:॥ १८८॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत आदिपर्वके अन्तर्गत स्वयंवरपर्वमें श्रीकृष्णवाक्यविषयक एक सौ अट्ठासीवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ १८८॥

(दाक्षिणात्य अधिक पाठके २ १/२ श्लोक मिलाकर कुल २६ १/२ श्लोक हैं।)
 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)