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mahabharat 1.188.23: 'जो दो कुमार कार्तिकेय दम्पति के समान उसके साथ थे, मैं अनुमान करता हूँ कि वे अश्विनीकुमारों के पुत्र नकुल और सहदेव थे; क्योंकि मैंने सुना है कि पाण्डव और कुन्तीदेवी सब लक्ष्म के जलते हुए घर से बच निकले थे॥ 23॥   |   mahabharat अध्याय 1.188: द्रुपदको मारनेके लिये उद्यत हुए राजाओंका सामना करनेके लिये भीम और अर्जुनका उद्यत होना और उनके विषयमें भगवान् श्रीकृष्णका बलरामजीसे वार्तालाप   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 188: द्रुपदको मारनेके लिये उद्यत हुए राजाओंका सामना करनेके लिये भीम और अर्जुनका उद्यत होना और उनके विषयमें भगवान् श्रीकृष्णका बलरामजीसे वार्तालाप  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  1.188.23 
यौ तौ कुमाराविव कार्तिकेयौ
द्वावश्विनेयाविति मे वितर्क:।
मुक्ता हि तस्माज्जतुवेश्मदाहा-
न्मया श्रुता: पाण्डुसुता: पृथा च॥ २३॥
 
 
अनुवाद
'जो दो कुमार कार्तिकेय दम्पति के समान उसके साथ थे, मैं अनुमान करता हूँ कि वे अश्विनीकुमारों के पुत्र नकुल और सहदेव थे; क्योंकि मैंने सुना है कि पाण्डव और कुन्तीदेवी सब लक्ष्म के जलते हुए घर से बच निकले थे॥ 23॥
 
'The two Kumaras who were with him like the couple Kartikeya were I guess that they were the sons of the Ashwini Kumars - Nakula and Sahadeva; because I have heard that the Pandavas and Kuntidevi all escaped from the burning house of Lakhsha.॥ 23॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)