श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 188: द्रुपदको मारनेके लिये उद्यत हुए राजाओंका सामना करनेके लिये भीम और अर्जुनका उद्यत होना और उनके विषयमें भगवान् श्रीकृष्णका बलरामजीसे वार्तालाप  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  1.188.22 
योऽसौ पुरस्तात् कमलायताक्ष-
स्तनुर्महासिंहगतिर्विनीत:।
गौर: प्रलम्बोज्ज्वलचारुघोणो
विनि:सृत: सोऽच्युत धर्मपुत्र:॥ २२॥
 
 
अनुवाद
'अच्युत! जिसके खिले हुए कमल के समान बड़े नेत्र हैं, जो दुबला-पतला, विनयशील, गौर वर्ण का है, बड़े सिंह के समान चलता है, जिसकी लम्बी, सुन्दर और मनोहर नाक है तथा जो अभी-अभी यहाँ से निकला है, वह धर्मपुत्र युधिष्ठिर है।
 
'Achyuta! The man who has large eyes like the blooming lotus petals, is slender, modest, fair, walks like a great lion and has a long, beautiful and charming nose and has just come out from here is Dharma's son Yudhishthira.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)